शुक्रवार, 26 मार्च 2010

हिन्दुस्तानी गजले


दौरे -जाम है साकी , रिंदी है मस्ती है


ये किस ढब का है मैखाना ,ये कैसी मैपरस्ती है




मुझे अब मयकदे में शीशा - -सागर से क्या लेना


कि मेरे दिल में चश्मे -शाहिदे -राना की मस्ती है




कभी वो भी ज़माना था कि हम दुनिया पे हँसते थे


कभी ये भी ज़माना है कि दुनिया हम पे हंसती है




मुहब्बत की कोई कीमत मुक़र्रर हो नही सकती


ये जिस कीमत पे मिल जाए उसी कीमत पे सस्ती है




मुहब्बत ही नही ख्वाहाँ जवानी के सहारे की


जवानी भी मुहब्बत के सहारे को तरसती है




समझ से अपनी बाहर है ,समझ में नही सकता


तिलिस्मे -राजे -हस्ती फिर तिलिस्मे -राजे -हस्ती है




कोई माने माने 'रवां ' सच है यही लेकिन


हमारी वज्हे-बरबादी हमारी खुद परस्ती है




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रचनाकार --------प्रेमबिहारी लाल सक्सेना 'रवाँ'

13 टिप्‍पणियां:

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

मुहब्बत की कोई कीमत मुक़र्रर हो नही सकती
ये जिस कीमत पे मिल जाए उसी कीमत पे सस्ती है....
बिल्कुल सच्चा शेर कहा है

मुहब्बत ही नही ख्वाहाँ जवानी के सहारे की
जवानी भी मुहब्बत के सहारे को तरसती है..
बहुत खूब...ज्योति जी, लाजवाब है आपकी पसंद.

शोभना चौरे ने कहा…

bahoot khoob .ak ak sher lajvab hai.
कभी वो भी ज़माना था कि हम दुनिया पे हँसते थे

कभी ये भी ज़माना है कि दुनिया हम पे हंसती है ।
akdam durust frmaya hai.
dhnywad .

dipayan ने कहा…

बहुत सुन्दर गज़ल ।

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत उम्दा गज़ल है..आभार प्रस्तुत करने का.

दीपक 'मशाल' ने कहा…

सोचता हूँ कहीं नकारात्मक टिप्पणी करुँ... लेकिन क्या करुँ आप ग़ज़ल ही ऐसी लिखी है कि सिवाए वाह-वाह के कुछ नहीं कह सकता..

Suman ने कहा…

nice

संजय भास्कर ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

Babli ने कहा…

कभी वो भी ज़माना था कि हम दुनिया पे हँसते थे
कभी ये भी ज़माना है कि दुनिया हम पे हंसती है ।
बिल्कुल सही कहा है आपने! बहुत खूब! हर एक शेर एक से बढ़कर एक हैं! इस उम्दा ग़ज़ल के लिए बधाई!

manav vikash vigyan aur adytam ने कहा…

bahoot he achha gajal hai

अमिताभ मीत ने कहा…

Behtareen Ghazal hai.... Thanks for sharing.

आमीन ने कहा…

realy nice

ज्योति सिंह ने कहा…

shukriyaan aap sabhi ka jo meri ko apni pasand banaya aur aapko pasand aaya iskeliye aabahaari hoon .

manu ने कहा…

कभी वो भी ज़माना था कि हम दुनिया पे हँसते थे

कभी ये भी ज़माना है कि दुनिया हम पे हंसती है ।


kyaa baat kahi hai...