गुरुवार, 4 मार्च 2021

हर युग में पूजित हो

नारी तुम स्वतंत्र हो,
जीवन धन यंत्र हो।
काल के कपाल पर,
लिखा सुख मंत्र हो।
 
सुरभित बनमाल हो,
जीवन की ताल हो।
मधु से सिंचित-सी,
कविता कमाल हो।
 
जीवन की छाया हो,
मोहभरी माया हो।
हर पल जो साथ रहे,
प्रेमसिक्त साया हो।
 
माता का मान हो,
पिता का सम्मान हो।
पति की इज्जत हो,
रिश्तों की शान हो।
 
हर युग में पूजित हो,
पांच दिवस दूषित हो।
जीवन को अंकुर दे,
मां बनकर उर्जित हो।
 
घर की मर्यादा हो,
प्रेमपूर्ण वादा हो।
प्रेम के सान्निध्य में,
खुशी का इरादा हो।
 
रंगभरी होली हो,
फगुनाई टोली हो।
प्रेमरस पगी-सी,
कोयल की बोली हो।
 
मन का अनुबंध हो,
प्रेम का प्रबंध हो।
जीवन को परिभाषित,
करता निबंध हो।

4 टिप्‍पणियां:

Jigyasa Singh ने कहा…

स्त्री का गुणगान करती सुंदर रचना..अप्रतिम गीत..

ज्योति सिंह ने कहा…

हार्दिक आभार, शुक्रिया जिज्ञासा जी

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सुंदर रचना

Jyoti Dehliwal ने कहा…

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति।