मंगलवार, 26 जनवरी 2010

आदर्श का स्तर





दूसरो को शिक्षा ,



दे रहे हम



स्वयं कितना अनुसरण



कर रहे हम ,



बात नैतिकता की



बात शिष्टता की ,



कहने -सुनने में



आसान भी ,



बेहतर भी



पर अहम है



खुद की जीवन के



आदर्श भरे स्तर की



वन्दे मातरम् -----जय हिंद


ज्योति सिंह

17 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ.

Apanatva ने कहा…

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें.......
sahee baat..................................

Apanatva ने कहा…

ise blog par mai shuru mai aai thee par shayad doosaro kee rachnae dalee thee aapne us samay..........
apana dhyan rakhiye..........
mai ise dour se gujar chukee hoo......
apana handbag halka rakhiye............patala takiya lagaiye.................aur apana baithte samay posture seedha rakhiye...........
swasthjaldee hona hai ye yaad rakhiye ............
all the best.........

Suman ने कहा…

nice

निर्मला कपिला ने कहा…

सटीक अभिवयक्ति । गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें

RAJ SINH ने कहा…

यहीं पर ही तो ,और ऐसे ही इन्सान और इंसानियत का फर्क समझ में आता है .
सफल बने गणतंत्र हमारा .
जय हिंद !

दिगम्बर नासवा ने कहा…

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ.....

सार्थक चिंतन करती रचना .........

अजय कुमार ने कहा…

’परदेश उपदेश कुशल बहुतेरे’
अच्छी रचना

राज भाटिय़ा ने कहा…

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ.जय हिंद
बहुत सुंदर बात कही आप ने

नरेन्द्र व्यास ने कहा…

bahut hee sahee kahaa aapne..sundar rachna..badhai

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

'ज्योति जी आदाब
...दूसरो को शिक्षा दे रहे हम स्वयं कितना अनुसरण
कर रहे हम बात नैतिकता की बात शिष्टता की ,कहने -सुनने में
आसान भी ,बेहतर भी पर अहम है
खुद की जीवन के आदर्श भरे स्तर की....
सच कहा आपने....यही होता है

निदा फाज़ली साहब का एक शेर है
ऐसे भी अकसर हमने अपने जी को बहलाया है
जिन बातों को खुद नहीं समझे, औरों को समझाया है...
चिन्तन करने योग्य रचना, बधाई
शाहिद मिर्ज़ा शाहिद

संजय भास्कर ने कहा…

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

Ram Shiv Murti Yadav ने कहा…

Behatrin rachna...sundar bhav...mubarak ho.

ज्योति सिंह ने कहा…

is samaroh me shamil hokar tirange ka maan badhane ke liye aap sabhi ki aabhari hoon ,jai hind ,saare jahan se achchha hindostaan hamara .

ज्योति सिंह ने कहा…

shahid ji njda fajli ko main bhi padhti hoon magar apni pasand jab takraati hai aur auro ki jubaan se dohrai jaati hai to uska aanand alag hi hota hai ,'mausam aate jaate hai 'nida fajli ki rachna sangrah me hai ye panktiyaan .

महफूज़ अली ने कहा…

सटीक अभिव्यक्ति के साथ... बहत सुंदर रचना...

नोट: लखनऊ से बाहर होने की वजह से .... काफी दिनों तक नहीं आ पाया ....माफ़ी चाहता हूँ....

ज्योति सिंह ने कहा…

aap sabhi ka tahe dil se shukriyaan ,vande matram .