शनिवार, 10 दिसंबर 2011

mera naya bachpan -subhdra kumari chauhaan

9 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बचपन की वे प्यारी बातें,
खिल के मिलती सारी बातें।

Amrita Tanmay ने कहा…

अच्छी लगी बचपन को फिर से देखना.

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

वाह ज्योति जी,
बहुत प्यारी कविता पेश की आपने...
बचपन की याद आ गई.
बहुत बहुत शुक्रिया.

amrendra "amar" ने कहा…

bahut acchi bahut pyari rachna

dheerendra ने कहा…

ज्योति जी ,..सुभद्रा कुमारी चौहान महान लेखिका को मेरा शत शत नमन....बढ़िया पोस्ट ...

मेरी नई पोस्ट की चंद लाइनें पेश है....

जहर इन्हीं का बोया है, प्रेम-भाव परिपाटी में
घोल दिया बारूद इन्होने, हँसते गाते माटी में,
मस्ती में बौराये नेता, चमचे लगे दलाली में
रख छूरी जनता के,अफसर मस्त है लाली में,

पूरी रचना पढ़ने के लिए काव्यान्जलि मे click करे

dheerendra ने कहा…

बहुत सुंदर,
नया साल सुखद एवं मंगलमय हो,..
आपके जीवन को प्रेम एवं विश्वास से महकाता रहे,

मेरी नई पोस्ट --"नये साल की खुशी मनाएं"--

somali ने कहा…

thank u mam..... bahut dino baad yeh kavita padne ko mili...

Amit Shukla ने कहा…

~!~ जिसने जीवन का सार दिया ,
उस जीवन में भी ईश्वर स्वरूप प्यार दिया ,
सारी स्रष्टी ऋणी तुम्हारी ,
जीवन भर !! गौ माँ !! बनकर ममता और दुलार दिया ~!~

~!~ अमित आनंद ~!~
https://www.facebook.com/amit.anand.904

Amit Shukla ने कहा…

~!~ जिसने जीवन का सार दिया ,
उस जीवन में भी ईश्वर स्वरूप प्यार दिया ,
सारी स्रष्टी ऋणी तुम्हारी ,
जीवन भर !! गौ माँ !! बनकर ममता और दुलार दिया ~!~

~!~ अमित आनंद ~!~
https://www.facebook.com/amit.anand.904