मंगलवार, 9 अगस्त 2011

भाई बहन


तू चिंगारी बनकर उड़ री ,जाग -जाग मैं ज्वाल बनूँ ,
तू बन जा हहराती गंगा ,मैं झेलम बेहाल बनूँ ,
आज बसन्ती चोला तेरा ,मैं भी सज लूं लाल बनूँ ,
तू भगिनी बन क्रान्ति कराली ,मैं भाई विकराल बनूँ ,
यहाँ कोई राधारानी ,वृन्दावन ,बंशीवाला ,
तू आँगन की ज्योति बहन री ,मैं घर का पहरे वाला
बहन प्रेम का पुतला हूँ मैं ,तू ममता की गोद बनी ,
मेरा जीवन क्रीडा -कौतुक तू प्रत्यक्ष प्रमोद भरी ,
मैं भाई फूलों में भूला ,मेरी बहन विनोद बनी ,
भाई की गति ,मति भगिनी की दोनों मंगल -मोद बनी
यह अपराध कलंक सुशीले ,सारे फूल जला देना
जननी की जंजीर बज रही ,चल तबियत बहला देना
भाई एक लहर बन आया ,बहन नदी की धारा है ,
संगम है ,गंगा उमड़ी है ,डूबा कूल -किनारा है ,
यह उन्माद ,बहन को अपना भाई एक सहारा है ,
यह अलमस्ती ,एक बहन ही भाई का ध्रुवतारा है ,
पागल घडी ,बहन -भाई है ,वह आजाद तराना है
मुसीबतों से ,बलिदानों से ,पत्थर को समझाना है
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कवि----गोपाल सिंह नेपाली
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बचपन से इस कविता को हम सभी भाई बहन अपनी माँ से सुनते रहे है और हमें आज भी ये उतनी ही प्रिय है ,इस पावन पर्व परडालने से इसकी महत्ता और बढ़ जायेगी ,शायद आप सभी मित्रोको भी भाये ,रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर बहुत बहुत बधाई

20 टिप्‍पणियां:

SAJAN.AAWARA ने कहा…

Bahut hi pyari kavita lagi...padhane ke liye dhanywaad....
Jai hind jai bharat

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

यह पहले नहीं पढ़ी थी, पढ़वाने का बहुत आभार। भाई-बहन के सम्बन्ध को इससे अधिक सुन्दर और सशक्त ढंग से व्यक्त नहीं किया जा सकता है।

Dr Varsha Singh ने कहा…

बहुत सुन्दर एवं मर्मस्पर्शी रचना !
हार्दिक शुभकामनायें !

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना पढवाई है ..

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

भाई एक लहर बन आया ,बहन नदी की धारा है ,
संगम है ,गंगा उमड़ी है ,डूबा कूल -किनारा है ,
यह उन्माद ,बहन को अपना भाई एक सहारा है ,
यह अलमस्ती ,एक बहन ही भाई का ध्रुवतारा है ,

बहुत सुन्दर चयन...बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

सुधीर ने कहा…

राखी के अवसर पर आपने बहुत ही अच्छी कविता साझा की। आभार

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना बहुत बढ़िया प्रस्तुति......

ब्लॉग की 100 वीं पोस्ट पर आपका स्वागत है!

!!अवलोकन हेतु यहाँ प्रतिदिन पधारे!!

Maheshwari kaneri ने कहा…

राखी के अवसर पर आपने बहुत ही अच्छी कविता पढ़वाई । आभार.....

mahendra srivastava ने कहा…

रक्षा बंधन त्यौहार की बहुत बहुत बधाई

सामयिक रचना, बहुत सुंदर

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

दिल को छूने वाली रचना पढ़वाने के लिए शुक्रिया ज्योति जी.

chirag ने कहा…

lovely poem

प्रेम सरोवर ने कहा…

रक्षाबंधन के पुनीत अवसर पर आपके द्ववारा प्रस्तुत गोपाल सिंह नेपाली की कविता भाव-प्रवण होने के कारण मन को दोलायमान सी कर गयी। अच्छी प्रस्तुति के लिए धन्यवाद। मेरे पोस्ट पर आप आमंत्रित हैं।

Maheshwari kaneri ने कहा…

सुन्दर चयन...बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

Rahul Paliwal ने कहा…

रक्षा बंधन त्यौहार की आपको भी बहुत बहुत बधाई...

NEELKAMAL VAISHNAW ने कहा…

नमस्कार....
बहुत ही सुन्दर लेख है आपकी बधाई स्वीकार करें
मैं आपके ब्लाग का फालोवर हूँ क्या आपको नहीं लगता की आपको भी मेरे ब्लाग में आकर अपनी सदस्यता का समावेश करना चाहिए मुझे बहुत प्रसन्नता होगी जब आप मेरे ब्लाग पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएँगे तो आपकी आगमन की आशा में पलकें बिछाए........
आपका ब्लागर मित्र
नीलकमल वैष्णव "अनिश"

इस लिंक के द्वारा आप मेरे ब्लाग तक पहुँच सकते हैं धन्यवाद्

1- MITRA-MADHUR: ज्ञान की कुंजी ......

2- BINDAAS_BAATEN: रक्तदान ...... नीलकमल वैष्णव

3- http://neelkamal5545.blogspot.com

NEELKAMAL VAISHNAW ने कहा…

ज्योति जी बहुत बहुत धन्यवाद् आपको मेरे ब्लाग में आने पर आप दोबारा जरुर आये और वहा से मेरे अन्य ब्लाग लिखा है वह क्लिक करके दुसरे ब्लागों पर भी जा सकते है आपको जो मेरी व्यंग्य पसंद आई उसके लिए भी धन्यवाद्

MITRA-MADHUR: ज्ञान की कुंजी ......

JHAROKHA ने कहा…

jyoti ji
sach me aapki yah rachna bahut hi man bhai.
bhai -bahan ke prem ki parakashhtha ko chhoti hui is addhbhut rachna ne man ko moh liya .ati sundar v man me rakhi ke parv ki mahima ki aur bhi mahtta badh gai.
bahut bahut hi
badhai swikaren
poonam

मेरा शौक ने कहा…

बहुत सुंदर रचना

मेरा शौक
http://www.vpsrajput.in

Anil Avtaar ने कहा…

Rakshaa Bandhan ke aaspas ki ye rachna bhavuk kar gai mujhe.. Aabhar

Ramakant Singh ने कहा…

पागल घडी ,बहन -भाई है ,वह आजाद तराना है ।
मुसीबतों से ,बलिदानों से ,पत्थर को समझाना है ।
beautiful lines on the realation
between brother and sister